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वेतन पर केंद्र सरकार का खर्च तीन गुना, 500,000 पद रिक्त

देवयानी छेत्री,
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Govt employees

 

मुंबई: सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2006-07 और 2016-17 के बीच, 10 सालों में कर्मचारियों के वेतन पर केंद्र सरकार के व्यय में तीन गुना वृद्धि हुई है, जबकि औसतन 500,000 पद रिक्त रहे हैं। यह जानकारी सरकारी आंकड़ों में सामने आई है।

 

2016-17 का आर्थ‌िक सर्वेक्षण कहता है, ” भारत जैसे कमजोर क्षमता वाले गरीब देश अपने नागरिकों को सुविधाएं मुहैया कराने जैसी स्थिति में तब आते हैं, जब वे सामान्य-सी और लगभग जंग खा चुके संसाधनों का सही उपयोग कर सके। इसके लिए उन्हें इन संसाधनों को सही करने की जरूरत है।

 

राज्य की क्षमता से आशय किसी सरकार की उस योग्यता से है, जहां मौजूदा संसाधनों का उपयोग करके शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत चीजें देश के नागरिकों को मुहैया कराई जाती हैं।

 

केंद्र सरकार के वेतन वेतन पैकेज की समीक्षा और संशोधन करने के लिए सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की 2015 की रिपोर्ट में कमी के कारण प्रभावित होने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता के संबंध में चिंताएं उठाई गई हैं।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि हर 100,000 लोगों के लिए, भारत के पास 139 केंद्रीय सरकारी कर्मचारी थे ( रेलवे और पदों के कर्मचारियों को छोड़कर ) जबकि अमरिका में 668 गैर-पोस्टल कर्मचारी थे।

 

स्टाफों की कम संख्या अक्सर अक्षमता में प्रकट होती है।

 

केंद्र संचालित सफदरजंग अस्पताल में ओवरवर्क कर रहे डॉक्टरों ने, आउट-पेशेंट विभाग (ओपीडी) के कार्यकाल में विस्तार करने के लिए कर्मचारियों के संख्या में वृद्धि की मांग की है, जैसा कि ‘द हिंदू’ ने 14 जुलाई, 2018 की रिपोर्ट में बताया है। इसी प्रकार, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षण और शोध की गुणवत्ता प्रभावित हुई, क्योंकि शिक्षण पदों का एक तिहाई खाली था। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 16 अगस्त, 2018 की रिपोर्ट में बताया है।  2017 में श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद (87 अरब डॉलर) से लगभग दोगुनी  राशि 11 लाख करोड़ रुपये (160 बिलियन डॉलर) केंद्र सरकार ने 10 वर्षों से 2016-17 तक अपने 3.2 मिलियन कर्मचारियों पर खर्च किया है। 2006-07 में 41,676 करोड़ रुपये से 2016-17 में यह खर्च 340 फीसदी बढ़कर 182,513 करोड़ रुपये हो गया है।

 

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन पर व्यय, 2006-07 से 2016-17

 

औसतन, 10 वर्षों में केंद्र सरकार की नौकरियों में 500,000 रिक्तियां थीं।

 

2006 में 3.5 मिलियन स्वीकृत पदों में से केवल 88 फीसदी या 3.1 मिलियन पदों को भरा गया था, यानी 417,495 कर्मचारियों का अंतर था, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है। 2016 में, 3.6 मिलियन में से 89 फीसदी या 3.2 मिलियन भरे गए थे, फिर भी 412,752 कर्मचारियों की रिक्तियां थीं।

 

केंद्र सरकार के विभागों और मंत्रालयों में स्वीकृत और भरे पद, 2006-16

 

अधिकांश रिक्तियों समूह सी (क्लर्क और कार्यालय सहयोगियों) नौकरियों में थी, जैसा कि आंकड़ों से पता चलता है। 2016-17 में समूह सी में 3.2 मिलियन स्वीकृत पदों में से 87 फीसदी या 2.8 मिलियन भरे गए थे।

 

अकेले समूह सी में लगभग 300,000-320,000 पदों की रिक्तियां थीं, जो 10 वर्षों में जोड़े गए कर्मचारियों(111,90 9) का दस गुना है।

 

कर्मचारी वेतनमान में वृद्धि, व्यय में वृद्धि

 

सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की रिपोर्ट कहती है कि ” कर्मचारियों के वेतन को व्यवहारिक रूप से समर्थ रखने के लिए वेतन संरचना में सुधार करना आवश्यक हो गया है, जिससे बेहतर, अधिक सक्षम और प्रतिभाशाली लोगों को शासन के लिए आकर्षित किया जा सके।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन निजी क्षेत्र के साथ प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए।

 

पिछले एक दशक से 2017 तक, सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद कर्मचारियों के हाथ में 157 फीसदी से अधिक का वेतन आया और न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि (7,000 रुपये से 18,000 रुपये तक) हुई।

 

2011-12 और 2015-16 के बीच मूल वेतन (36 फीसदी) की तुलना में महंगाई भत्ता (डीए ,रहने वाले खर्चों को कवर करने के लिए अतिरिक्त मुआवजा) वेतन संरचना के एक बड़े हिस्से के लिए जिम्मेदार (42 फीसदी) है। सातवीं केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित संशोधन के बाद, 2016-17 में प्रवृत्ति बदल गई।

 

2016-17 में, केंद्रीय सरकार के वेतन में से 66 फीसदी मूल वेतन की हिस्सेदारी थी, जबकि डीए की 16 फीसदी की हिस्सेदारी रही है। 2016-17 की रिपोर्ट के मुताबिक घर के किराए और अन्य भत्ते की 4 फीसदी और 14 फीसदी की हिस्सेदारी रही है।

 

अधिकांश रिक्तियों के साथ मंत्रालय, 2014-16

Source: Final report of the 7th Pay Commission 2015; Annual Report on Pay and Allowances of Central Government Civilian Employees 2016-2017*

 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, जो पानी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, जलवायु, कृषि और भोजन से जुड़े विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुसंधान और विकास को निधि देता है, आधे से कम लोगों की क्षमता पर चल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में 37 फीसदी रिक्त स्थान थे। 2016 में 55 फीसदी पद रिक्त हुए हैं।

 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय में 49 फीसदी पद रिक्त हैं, इसके बाद कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में 44 फीसदी पद रिक्त हैं। रक्षा मंत्रालय में 2016 में 187,054 पदों (31 फीसदी) के साथ सबसे अधिक रिक्तियां थीं। कुल मिलाकर, आंकड़ों के मुताबकि,  51 मंत्रालयों में औसतन  25 फीसदी से 35 फीसदी कर्मचारियों की कमी दिखाई देती है।

 

कुछ रिक्तियों को भरने के लिए, केंद्र सरकार 10 क्षेत्रों में अनुबंध पर संयुक्त सचिवों जैसे वरिष्ठ प्रबंधन पदों में पेशेवरों को रोजगार देने की योजना बना रही है। श्रम मंत्री बंदारू दत्तात्रेय द्वारा लोकसभा को दिए गए जवाब के अनुसार हालांकि अनुबंध कर्मचारियों की संख्या पर कोई डेटा नहीं है।

 

सातवें केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार अनुबंध श्रमिकों का एक प्रमुख नियोक्ता था।

 

2012-13 में केंद्र ने संविदात्मक जनशक्ति पर 300 करोड़ रुपये खर्च किए। कौशल के आउटसोर्सिंग से संबंधित नियमों को शामिल करने वाला संगठन, इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन द्वारा 2014 की रिपोर्ट के मुताबिक 43 फीसदी सरकारी कर्मचारी अस्थायी नौकरियां में हैं।

 

(छेत्री लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वुमन से ग्रैजुएट हैं और इंडियास्पेंड में इंटर्न हैं।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 10 सितंबर, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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