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दो राज्यों में जीत से भी, राज्यसभा में भाजपा का दबदबा नहीं

प्राची सालवे,
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हाल ही में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा ) ने जीत  हासिल की है। एक विश्लेषण के अनुसार, इन दो राज्यों में मिली जीत सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को राज्य सभा के माध्यम से महत्वपूर्ण बिलों को आगे बढ़ाने के लिए विधायी ताकत नहीं देगी।  भाजपा अब 29 भारतीय राज्यों में से 19 राज्यों और देश की 67 फीसदी आबादी पर शासन करता है। लोकसभा में, 280 सदस्यों के साथ यह पहले से ही बहुमत सरकार चलाता है।

 

हालांकि, दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘पीआरएस लेजिसलेटिव असेंबली’ ने हालिया विश्लेषण में  गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जीत के प्रभाव पर बताया है कि गुजरात से चार सांसद 2018 में राज्यसभा से सेवानिवृत्त होंगे। उनमें से भाजपा दो और कांग्रेस को दो सीटों का लाभ मिलेगा।

 

हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा में केवल एक सीट है और भाजपा की जीत के साथ ऊपरी सदन में उसकी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

सरकार के आंकड़ों के अनुसार 20 दिसंबर, 2017 तक राज्यसभा के 239 सदस्यों में से भाजपा के अब 57 सदस्य हैं। पीआरएस विश्लेषण के मुताबिक, 2018 में, उत्तर प्रदेश (यूपी) से नौ सदस्यों, गुजरात से दो, मणिपुर और गोवा में से एक-एक की वृद्धि के साथ यह 70 तक बढ़ जाएगा।

 

लेकिन भाजपा को हालिया चुनावी जीत की तुलना में अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता होगी क्योंकि संसद को दोनों सदनों द्वारा पास किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कानून पारित नहीं हो सकता है, जैसा कि जैसा कि इंडियास्पेंड ने नवंबर 2015 की रिपोर्ट में बताया है।

 

इस सत्र में आ रहे हैं महत्वपूर्ण बिल

 

15 दिसंबर, 2017 से 5 जनवरी, 2018 तक चल रहे शीतकालीन सत्र, में 21 दिनों में 14 बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इसमें कुल 39 बिल पेश किए जाएंगे, जिनमें से 25 को पारित करने के लिए, 14 का परिचय, विचार और पास करने के और एक वापसी के लिए विचार किया जाएगा, जैसा कि प्रेस सूचना ब्यूरो के रिलीज  में बताया गया है।

 

एक समान नागरिक संहिता विधेयक जिसे संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है,  उसे पारित होने के लिए राज्यसभा में 167 मतों और लोकसभा में 271 मतों की आवश्यकता होगी।

 

इस सत्र में लंबित अन्य महत्वपूर्ण व्यवसाय में वित्तीय संकल्प और जमा बीमा विधेयक शामिल हैं, जो व्यथित बैंकों की जमानत पर सरकार के हिस्से और सरोगेट पर प्रतिबंध लगाने के लिए बिल को कम करेगा।

 

पांच राज्यों में से दो राज्यों में भाजपा का प्रभुत्व है, जिनकी राज्यसभा में 100 सीटें हैं

 

राज्यसभा सदस्य राज्यों से चुने जाते हैं और राज्य विधानसभा में एक पार्टी का प्रतिनिधित्व ऊपरी सदन में अपनी ताकत को प्रभावित करता है।

 

सत्तारूढ़ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन में 78 सीटें हैं, जिसमें इसके सहयोगी, तेलुगू देशम पार्टी छह सीटें शामिल हैं। विपक्षी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन में 74 सीटें हैं।

 

राज्य सभा में पार्टी अनुसार प्रतिनिधित्व

Source: Rajya Sabha

 

राज्य सभा की सदस्यता राज्य की आबादी के द्वारा निर्धारित की जाती है। आबादी के आधार पर टॉप पांच राज्य – उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल में राज्यसभा में 100 सीटें हैं। वर्तमान में टॉप पांच में से दो राज्यों ( महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ) में भाजपा सत्ता में है और बिहार में गठबंधन पार्टनर है।

 

राज्य अनुसार, राज्य सभा में प्रतिनिधित्व

Source: Rajya Sabha

 

महाराष्ट्र में 1 9 सीटों में, भाजपा में पांच और उसके सहयोगी शिवसेना के तीन सीट हैं। कांग्रेस के पास राज्य में चार सीटें हैं।  उत्तर प्रदेश में, भाजपा के पास दो सीटें हैं और कांग्रेस के पास तीन सीटें हैं। हालांकि राज्य में भाजपा की बड़ी जीत ( 503 सीटों में से 312 ) इसके लाभ की तरह काम करेंगे।

 

छह साल बाद राज्यसभा सदस्य रिटायर हो जाते हैं। वर्ष 2018 में, 65 सदस्य निवृत्त होंगे और उनमें से 9 उत्तर प्रदेश से होंगे। इससे राज्यसभा में कुल भाजपा सांसदों को 31 सीटों में से 11 सीटों पर लाने का मौका मिलेगा। 2020 में, भाजपा के पास अकेले उत्तर प्रदेश से 31 सीटों में 21 सीटें होगी।

 

(सालवे विश्लेषक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 26 दिसंबर 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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