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हर रोज 600 ट्रक प्लास्टिक कचरा फेंका जा रहा है!

अथर परवेज,
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श्रीनगर में एथेन डंपिंग साइट पर प्लास्टिक कचरा। जम्मू-कश्मीर ने जनवरी, 2018 में पॉलीथीन बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन कार्यान्वयन ढीला है। यही स्थिति 24 अन्य राज्यों के मामले में भी है, जहां प्लास्टिक के उपयोग को लेकर कुछ तरह के प्रतिबंध मौजूद हैं।

 

श्रीनगर: पच्चीस भारतीय राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में अब प्लास्टिक से बने बैग के उपयोग पर कुछ खास तरह के प्रतिबंध हैं। लेकिन यह सुचारू रूप से लागू नहीं है। प्लास्टिक ( जिसे अपघटित होने में सैंकड़ो वर्ष लगते हैं ) का उपयोग होना जारी है, जो भारत के जल निकायों और भराव क्षेत्रों में एकत्र होते हैं। यह जानकारी इंडियास्पेंड के जांच में सामने आई है।

 

जम्मू-कश्मीर में, कई विक्रेताओं ने तीन महीने के पुराने प्रतिबंध के बारे में नहीं सुना है। कर्नाटक और पंजाब में, जहां 2016 से प्रतिबंध लागू है, यह ज्यादातर हिस्सों में अप्रभावी रहता है, क्योंकि यहां प्लास्टिक बैग की व्यापक उपलब्धता और मांग है। अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में, प्लास्टिक  के अनुमत ग्रेड के बारे में भ्रम है। उत्तराखंड में, उपयोग “धीरे-धीरे खत्म हो रहा है”, जैसा कि विशेषज्ञों ने कहा, जबकि राजस्थान में, जागरूकता अभियान का प्रभाव नजर आ रहा है।

 

जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र जनवरी और मार्च 2018 में प्लास्टिक बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले नवीनतम राज्य हैं। प्लास्टिक बैग का उपयोग पर जुर्माना किया जा सकता है ( 500 रुपये से 25,000 रुपये तक ) और भंडारण और वितरण पर पांच साल तक कारावास हो सकता है।

 

प्लास्टिक की समस्या

 

हर दिन, भारतीय शहर 15,000 टन प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं जो 10 टन प्रति ट्रक पर 1,500 ट्रक भरने के लिए पर्याप्त हैं। इनमें से 9,000 टन एकत्र और संसाधित / पुनर्नवीनीकरण होते हैं, जबकि शेष 6,000 टन, या 600 ट्रकलोड, आमतौर पर कूड़े की नालियों, सड़कों या भराव क्षेत्रों में चले जाते हैं, जैसा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की जनवरी 2015 की मूल्यांकन रिपोर्ट में बताया गया है।

 

सीपीसीबी की रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 66 फीसदी प्लास्टिक कचरा मिश्रित अपशिष्ट-पॉलीबैग और पाउच भोजन को पैक करने के लिए इस्तेमाल करने वाली थैलियों का होता है, मुख्य रूप से आवासीय इलाकों से। भराव क्षेत्रों में प्लास्टिक का जमाव आसपास के मिट्टी, जमीन या सतह के पानी को दूषित करके प्रदूषण की काफी समस्या पैदा कर सकते हैं।

 

अनुमानों के मुताबिक, प्लास्टिक को निगलने या मछली पकड़ने की नायलॉन की जाल, जाल, या प्लास्टिक रस्सी में उलझने से वैश्विक स्तर पर प्रत्येक वर्ष लगभग 10 लाख समुद्री पक्षी और एक लाख समुद्री स्तनधारी मर जाते हैं। मई 2012 में, दो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, न्यायमूर्ति सिंघवी और न्यायमूर्ति मुखोपाध्याय ने कहा कि “ अगर प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जाता है तो अगली पीढ़ी को परमाणु बम से भी ज्यादा गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।”

 

भारत हर साल 5.6 मिलियन टन प्लास्टिक कचरे का उत्पादन करता है, और देश की हर साल दुनिया के महासागरों में 60 फीसदी प्लास्टिक कचरे का उत्पादन करने की हिस्सेदारी होती है,  जैसा कि  अनुमान बताते हैं। वैश्विक जर्नल ‘एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ के अक्टूबर, 2017 के एक लेख के अनुसार दुनिया की दस नदियों में से तीन जो दुनिया के महासागरों में 90 फीसदी प्लास्टिक ले जाती हैं, सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र हैं।

 

20 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में पूर्ण प्रतिबंध, पांच राज्यों में आंशिक प्रतिबंध

 

कपास या जूट के बैग जैसे प्लास्टिक के विकल्प अक्सर महंगे होते हैं। इसलिए, कुछ राज्य 50 माइक्रोन मोटाई से ऊपर पॉलीथीन बैग की अनुमति देते हैं। इससे 20 फीसदी तक लागत में वृद्धि की संभावना है । इसलिए, मुफ्त बैग प्रदान करने की प्रवृत्ति नीचे आ जाएगी और अपशिष्ट-एकत्रित करने वाले द्वारा संग्रह कुछ हद तक बढ़ेगा, जैसा कि प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स 2016 द्वारा बताया गया है। 20 भारतीय राज्यों में प्लास्टिक बैग के निर्माण, आपूर्ति और भंडारण और कप, प्लेट्स, चम्मच, चश्मा जैसे अन्य प्लास्टिक सामानों पर पूर्ण प्रतिबंध है, जबकि पांच राज्यों में आंशिक प्रतिबंध है।

 

राज्य अनुसार प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध की स्थिति

 

Source: Data provided by Central Pollution Control Board; *For Maharashtra, information is from news reports.

 

सस्ते कीमतों पर उपलब्धता, निरंतर आपूर्ति हैं बाधाएं

 

प्लास्टिक बैग के उपयोग पर जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध के बाद, हमने कार्यान्वयन के स्तर का आकलन करने के लिए स्थानीय दुकानदारों से बात की। ओमपोरा-बडगाम के एक दुकानदार अब्दुल मजीद पॉल ने प्लास्टिक बैग के उपयोग के बारे में इंडियास्पेंड द्वारा पूछे जाने पर कहा, “मैंने केवल आपके द्वारा प्रतिबंध के बारे में सुना है। इसके बारे में कोई अन्य ग्राहक बात नहीं करता है। वास्तव में, यदि वे बहुत सी चीजें खरीदते हैं तो वे अधिक पॉलीथीन बैग मांगते हैं। “

 

जिन दुकानदारों और सब्जी बिक्रेताओं से हमने बात की, उनमें से अधिकांश ने कहा,  सरकार को पॉलीथीन विनिर्माण को विनियमित करने और प्लास्टिक बैग ले जाने वाले दंडित करने की शुरूआत करने की जरूरत है। श्रीनगर के व्यस्त बबतामलू क्षेत्र में एक विक्रेता गुलजार अहमद ने कहा, “केवल दुकानदारों और विक्रेताओं पर जुर्माना लगाने से कुछ नहीं होगा। सरकार को पॉलिथिन के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने दें, लोग स्वचालित रूप से गैर-प्लास्टिक बैग का उपयोग करेंगे। “

 

 

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श्रीनगर में कचरे को छांटता एक अपशिष्ट श्रमिक।  अधिकांश दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं ने कहा कि सरकार को विनिर्माण को विनियमित करने के साथ पॉलिथिन प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की जरूरत है, और प्लास्टिक बैग ले जाने वाले लोगों को दंडित करने की जरूरत है।

 

श्रीनगर नगर निगम के नगर निगम आयुक्त रियाज अहमद वानी ने कहा, “पॉलीथीन बैग ले जाने वाले लोगों को दंडित करने का सुझाव अच्छा है, इससे अच्छे नतीजे आ सकते हैं।

 

वानी ने इंडियास्पेंड से बातचीत में कहा, “हम अक्सर अच्छे दिखने वाले, स्टाइलिश टाई पहने हुए लोगों को  बिना किसी शर्मिंदगी के अपने हाथों में पॉलीथीन बैग ले कर जाते देखते हैं। ऐसा करने वाले अगर बिनी किसी जुर्माने या दंड से निकल सकते हैं तो किसी सब्जी बिक्रेता और फलों के विक्रेताओं पर कैसे जुर्माना लगाया जा सकता है? “

 

कर्नाटक में, निर्माण, भंडारण, वितरण और प्लास्टिक के उपयोग जैसे कैरी बैग, बैनर, प्लास्टिक प्लेट, कप और चम्मच पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध है। बेंगलुरु स्थित ‘अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट’ (एटीआरई) में सहायक साथी मेघा शेनॉय ने इंडियास्पेन्ड को बताया कि फिर भी प्रतिबंध कई क्षेत्रों में अप्रभावी है, हालांकि यह निश्चित रूप से कुछ हिस्सों में कुछ प्रभाव डाल रहा है।
 

शेनॉय ने कहा , “प्रतिबंध प्रभावी रूप से तब लागू किया जाएगा जब लागू होने के प्रमाणों को पूरा करने के लिए एक मजबूत प्रणाली हो और संबंधित अधिकारियों और विभागों को भी उचित श्रेय दिया जाए।

 

शेनॉय ने कहा , “प्रतिबंध प्रभावी रूप से तब लागू किया जाएगा जब लागू होने के प्रमाणों को पूरा करने के लिए एक मजबूत प्रणाली हो और संबंधित अधिकारियों और विभागों को भी उचित श्रेय दिया जाए।

 

शेनॉय ने हमें बताया कि राज्य में सत्ताधारी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने व्यापक रूप से फ्लेक्स बैनर, ध्वजपट और अन्य प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग किया है, क्योंकि प्रशासनिक अधिकारी इन पार्टियों पर प्रतिबंध लागू करने में असमर्थ हैं।

 

पंजाब विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर हरमिंदर पाल सिंह ने इंडियास्पेंड को बताया, “पंजाब में, जहां एक समान प्रतिबंध है, पॉलिथिन बैग का उपयोग जारी है। यहां तक ​​कि निम्न ग्रेड गुणवत्ता के पॉलीथीन बैग भी (जो अधिक नुकसान पहुंचाते हैं) पंजाब में प्रयोग होते हैं और इन्हें कच्चे और पके हुए दोनों खाद्य पदार्थों को ले जाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। “

 

सिंह ने कहा कि अधिकारी कभी-कभी दुकानदारों पर जुर्माना लगाते हैं, लेकिन इस तरह के उपायों को सुसंगत होना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि प्रतिबंध चंडीगढ़ में भी काम नहीं कर रहा है, जहां इसे पंजाब की तुलना में कहीं अधिक आसानी से लागू किया जा सकता था।

 

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अभियंता कृष्ण गर्ग ने इंडियास्पेंड को बताया, “हम पंजाब में सभी प्लास्टिक कैरी बैग विनिर्माण इकाइयों को बंद करने में कामयाब रहे थे।” गर्ग ने आगे कहा, “लेकिन, पॉलीथीन को अन्य राज्यों से पंजाब में पंप किया जा रहा है- ज्यादातर गुजरात से- और इसका वितरण और उपयोग को स्थानीय अधिकारियों द्वारा रोका नहीं जा रहा है, जिससे प्रतिबंध अप्रभावी हो रहा है।”

 

आंशिक प्रतिबंध बनाम पूर्ण प्रतिबंध,एक भ्रम

 

कुछ राज्यों में, इस बारे में भ्रम है कि प्रतिबंध पूर्ण है या आंशिक है।

 

अरुणाचल प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव तापक रिबा ने कहा कि पॉलीथीन कैरी बैग पूरी तरह से अपने राज्य में प्रतिबंधित नहीं हैं, जबकि सीपीसीबी से इंडियास्पेन्ड द्वारा एकत्र की गई जानकारी से पता चला है कि पूर्ण प्रतिबंध है। रिबा ने इंडियास्पेंड को बताया, “प्रतिबंध केवल 50 माइक्रोन से कम की मोटाई के पॉलीथीन बैग पर है। कुछ जिलों में, यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है, लेकिन अधिकांश जिलों में इसे आंशिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।औचक जांच पर, अधिकारियों द्वारा महसूस / स्पर्श से मोटाई सुनिश्चित होती है।”

 

यह पूछे जाने पर कि प्रतिबंध का कार्यान्वयन सफल क्यों नहीं है, रिबा ने कहा कि हानिकारक प्रभावों के बारे में उचित जागरूकता की आवश्यकता है, “लोगों को प्लास्टिक का उपयोग करना आसान लगता है, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभावों को नहीं जानते।”

 

लखनऊ नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने इंडियास्पेंड को बताया, “हम छापे मारते हैं और जुर्माना लगाते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इससे काम नहीं हो रहा है।”

 

भूषण ने कहा, “पॉलिथिन बैग की मोटाई के बीच अंतर करने में भी चुनौतियां हैं। यह नग्न आंखों के साथ निर्धारित नहीं किया जा सकता है; कुछ साधन होना चाहिए। “

 

उत्तराखंड प्रगति करता है, राजस्थान व्यापक जागरूकता का दावा करता है

 

उत्तराखंड में नैनीताल स्थित ‘केंद्रीय पर्यावरण हिमालयी एसोसिएशन’ के कार्यकारी निदेशक पंकज तिवारी ने इंडियास्पेन्ड को बताया, “प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग धीरे-धीरे नैनिताल में खत्म हो रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रतिबंध को काफी हद तक लागू किया जा रहा है, लेकिन पूरी तरह से प्रतिबंध लागू करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है।

 

उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एस पी सुबुधि ने हमें बताया, “ कुल प्रतिबंध तब तक संभव नहीं दिखता है, जब तक कि प्लास्टिक का उत्पादन नियंत्रित या विनियमित नहीं किया जाता ।”

 

जयपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर मनोज भारद्वाज ने इंडियास्पेंड को बताया कि राजस्थान पॉलिथिन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने में कामयाब रहा है।

 

भारद्वाज ने बताया, “हमने प्रतिबंध लागू करने से पहले बहुत सी जागरूकता अभियान चलाया। हम स्कूलों और सब्जी बाजारों सहित हर जगह गए और प्लास्टिक के उपयोग के नकारात्मक पहलुओं को विस्तार से प्रदर्शित किया, बाद में, हमने राज्य में प्लास्टिक बैग के निर्माण को भी रोक दिया और हम लोगों को विकल्प प्रदान कर रहे हैं जैसे कि विभिन्न स्थानों पर कपड़ा बैग-वेंडिंग मशीनें। “

 

 

 

इंडियास्पेंड की ओर से सुझाए गए कुछ समाधान:
 

  • प्लास्टिक कैरी बैग के निर्माण पर प्रतिबंध लगाएं और सुनिश्चित करें कि बाजार में सस्ता विकल्प उपलब्ध हो। इसके अलावा, उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए पॉलिथिन बैग के उपयोग पर जुर्माना लगाएं।–स्वाती सिंह संबाल, कार्यक्रम प्रबंधक, विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली;
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  • प्रतिबंध और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के बारे में और जागरूकता की आवश्यकता है। नियमों को व्यापक रूप से लागू करने की आवश्यकता है और प्रवर्तन को मापने और निगरानी करने की आवश्यकता है। साथ ही, सरकार को नवाचारों और सुविधाओं की स्थापना को प्रोत्साहित करने की जरूरत है, जो टिकाऊ विकल्प प्रदान करते हैं -मेघा शेनॉय, एडजक्ट फेलो, अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड और एनवायरामेंट, बेंगलुरू
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  • प्लास्टिक को देश भर में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा किए जा रहे प्रयासों के अनुसार केवल बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बैग का उपयोग किया जाना चाहिए। केंद्र ने हाल ही में भारत भर में माल और सेवा कर (जीएसटी) पेश किया है और हम सभी देख रहे हैं कि इसे सफलतापूर्वक कैसे कार्यान्वित किया जा रहा है। इसी तरह, अगर प्लास्टिक के लेयर बैग का उपयोग भारत भर में किया जाता है, तो इसका कार्यान्वयन पर बड़ा असर होगा।–पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अभियंता कृष्ण सिंह;
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  • हमें शीर्ष से रोल मॉडल बनाने की जरूरत है। यदि व्यापार समूह और सरकारी कार्यालयों को प्लास्टिक से मुक्त किया जाता है, तो जनता को संदेश संवाद करना आसान होगा।.–उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एस पी सुबुद्धि।

 

 

(परवेज पत्रकार हैं और श्रीनगर में रहते हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 18 अप्रैल, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित किया गया है।

 

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