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हमने हरियाणा की तुलना में डेरा केस को बेहतर तरीके संभाला, क्योंकि हमारी तैयारी पूरी थी : मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह

जावेद अंसारी,
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2020

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पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह

 

28 अगस्त 2017 को स्व घोषित भगवान, गुरमीत राम-रहीम को बलात्कार के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के लिए असली परीक्षा शुरु हो गई थी, क्योंकि डेरा प्रमुख गुरमीत राम-रहीम के अनुनायियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की धमकी दी थी। इस स्थिति पर नियंत्रण पाना, उनके लिए बड़ी चुनौती थी।

 

लेकिन सिंह की कांग्रेस सरकार तत्कानी परिस्थियों में हालात पर नियंत्र रखने में सफल रही। हालांकि राम रहीम के पंथ, डेरा सच्चा सौदा को पंजाब में काफी समर्थन है, विशेष रुप में राम रहीम दलितों में बहुत लोकप्रिय है। जबकि पड़ोसी हरियाणा की स्थिति विपरीत रही थी। वहां राम रहीम के समर्थकों द्वारा किए गए हिंसा में  36 लोग मारे गए और स्थिति पर नियत्रण के लिए सेना को बुलाया गया।सिंह का मानना है कि हरियाणा के पंचकुला में हजारों डेरा समर्थकों को इकट्ठा होने की अनुमति देना ‘बड़ी गलती’थी। पंचकुला में सबसे ज्यादा हिंसक प्रतिक्रियाएं देखीं गई थी। जबकि पंजाब में हालात से निपटने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिंह की सरकार ने राम-रहीम के मामले में अदालत का फैसला आने के 15 दिन पहले ही काम शुरु कर दिया था।

 

अमरिंदर सिंह कहते हैं, “मैंने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री और सेना के कमांडर से बात की थी। खुफिया एजेंसिंयों द्वारा पहले ही जानकारी दी गई थी कि यदि अदालत का फैसला खिलाफ आया तो डेरा अनुयायियों हिंसा का सहारा ले सकते हैं। ”

 

पटियाला  के शाही  परिवार से ताल्लुक रखने वाले अमरिंदर सिंह को पटियाला का महाराजा भी कहा जाता है। अमरिंदर सिंह के पास राजनीतिक अनुभव की कमी नहीं हैं। वह अब पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में हैं। उनका पहला कार्यकाल वर्ष 2002-2007 का था। इससे पहले वह भारतीय सेना में थे, जहां से वह कैप्टन के रूप में सेवानिवृत्त हुए। वह युद्ध से सिख इतिहास तक के कई विषयों पर कई किताबों के लेखक रहे हैं।

 

सिंह कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, और पंजाब में सत्ता बहाल करने के बाद पार्टी में उनकी शक्ति और स्थिति काफी मजबूत हुई है।

 

सिंह अब पंजाब को कई संकटों से उबारने में जुटे हैं। उनकी चुनौतियों में धीमी कृषि व्यवस्था, औद्योगिक गिरावट, बेरोजगारी, व्यापक रूप से नागरिकों में ड्रग्स की लत और 2.08 लाख करोड़ रुपये (32 अरब डॉलर) का ऋण शामिल है।

 

सिंह की आवाज में अब भी सेना का अंदाज झलकता है। उन्होंने इंडियास्पेंड के साथ विवादास्पद गुरुमीत सिंह की गिरफ्तारी के बाद के हालात सहित राज्य के कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है।

 

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बलात्कार के लिए दोषी मानने और सजा सुनाने के बाद हुई हिंसा में लगभग 36 लोग मारे गए और 269 घायल हो गए। क्या आपको लगता है कि पंजाब और हरियाणा की राज्य सरकारों ने हालात को बेहतर तरीके से संभाला है?

 

मैं हरियाणा के लिए जवाब नहीं दे सकता, सिवाय इसके कि इतनी बड़ी भीड़ को पंचकुला में इकट्ठा करने की अनुमति देकर बड़ी गलती की गई थी। इसे रोका जाना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता, तो चीजें अलग होतीं।

 

जहां तक ​​पंजाब का सवाल है तो मुझे लगता है कि, फैसला सुनाने के बाद पंचकूला में हिंसा की शुरुआत के बाद अत्यधिक अस्थिर माहौल पर विचार करते हुए हमने स्थिति को अच्छी तरह से संभाला है। जमीनी स्तर पर भी इसका समर्थन किया गया है। मैं बता दूं कि केवल 52 छोटी-मोटी घटनाएं, मैं फिर दोहराता हूं कुछ क्षेत्रों में छोटी-मोटी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में एक भी जान नहीं गई हैं।

 

स्पष्ट रूप से, सेना और अर्द्धसैनिक बलों के साथ सरकार और पंजाब पुलिस में मेरे अधिकारियों द्वारा उठाए गए निवारक उपायों ने शांति बनाए रखने में मदद की। मैं राज्य के हर व्यक्ति को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिसने कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद की है।

 

मैं यहां एक और बात करना चाहूंगा। हमने इन निवारक उपायों पर 13 अगस्त, 2017 से विचार करना शुरु कर दिया था। उन्हीं दिनों मैंने गृह मंत्री और सेना के कमांडर से भी इस मुद्दे पर बात की थी।  खुफिया एजेंसिंयों द्वारा पहले ही जानकारी दी गई थी कि यदि अदालत का फैसला खिलाफ आया तो डेरा अनुयायी हिंसा का सहारा लेकर कानून को अपने हाथ में ले सकते हैं।

 

वर्ष 2017 की बात करें तो अभी पंजाब में  में ऐसे कई तरह डेरे हैं। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम ने दावा किया कि उनके पास 60 लाख अनुयायी हैं। आप क्यों सोचते हैं कि पंजाब के लोग डर के कारण अनुयायी बनते हैं ? क्या जाति एक कारण है, क्योंकि उनके ज्यादातर अनुयायी दलित हैं?

 

यह व्यक्तिगत विश्वास और निष्ठा का मामला है। मुझे नहीं पता कि डेरा सच्चा सौदा के उदय में जाति की भूमिका कितनी है।

 

मैं यह कह सकता हूं कि जब लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो वे बाह्य समर्थन की तलाश करते हैं, विशेष रूप से भावनात्मक स्तर पर। अधिकतर, यह समर्थन धार्मिक और अन्य ऐसे संस्थानों से आता है, जो स्वाभाविक रूप से उनके साथ मुसीबत से सहायता का वादा करता है।

 

इसलिए, यदि डेरा के अधिकांश अनुयायियों समाज के वंचित वर्गों से थे, तो इसका कराण उनके द्वारा गंभीर समस्याओं का सामना करना हो सकता है, जिस कारण वे समर्थन और आशा की उम्मीद में ऐसे लोगों के पास आते हैं।

 

डेरा सच्चा सौदा की राजनीतिक मामलों की शाखा थी और उन्होंने लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को खुला समर्थन दिया था। कांग्रेस ने भी इसके समर्थन की मांग की है। क्या आपको लगता है कि राजनीतिक दलों के साथ समर्थन ने डेरा को शक्तिशाली और कानून और व्यवस्था से निडर बनाया है?

 

देखिए, किसी भी राज्य या देश में कानून का डर या इसकी कमी कई कारणों से उत्पन्न होती है। हालांकि मैं मानता हूं कि राजनीतिक संरक्षण से कभी-कभी निडरता उत्पन्न होती है लेकिन लोगों के बीच ऐसी प्रवृत्ति या व्यवहार के उदय के लिए यह केवल एक ही चीज जिम्मेदारी नहीं है।

 

अराजकता तो सिर्फ इस बात से भी हो सकती है कि लोग अपनी भावनाओं या मान्यताओं की रक्षा करने या उन मान्यताओं के किसी प्रतीक की रक्षा करने में उत्तेजित हो जाएं, जैसा कि इस मामले में हुआ है।

 

राम रहीम मामले में रिपोर्टों के अनुसार, यह दोनों का मिश्रण था। किसी भी मामले में, कानून का उल्लंघन अक्सर उन लोगों द्वारा किया जाता है, जिनके पास कोई राजनीतिक संबंध नहीं है या संरक्षण नहीं है। इसलिए, मेरे विचार से पंचकुला न्यायालय के फैसले के मद्देनजर अराजकता के लिए डेरा के पास राजनीतिक समर्थन को जिम्मेदार ठहराया जाना उचित नहीं है।

 

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, किसी भी तरह के डेरा को राजनीतिक संरक्षण जारी रखने या बंद करने का निर्णय राजनीतिक दलों की राष्ट्रीय समिति के पास है। इस संबंध में कोई भी निर्णय राष्ट्रीय समिति ही ले सकती है।

 

पंजाब को हरित क्रांति का भू-आधार कहा जाता है, लेकिन इसके कृषि क्षेत्र पीड़ित हैं। पंजाब सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, नौ वर्षों में कृषि विकास दर में गिरावट हुई है, यह आंकड़े 2005-06 में 0.95 फीसदी से गिरकर 2014-15 में -3.4 फीसदी हुआ है। 2010-11 में पांच साल से खेत के आकार 3. 9 हेक्टेयर से 3.7 हेक्टेयर तक हुए हैं। पंजाब सरकार कृषि अर्थव्यवस्था को सुधारने की किस प्रकार कोशिश कर रही है?

 

हां, दुर्भाग्य से, , पंजाब में कृषि के सामने की स्थिति बहुत गंभीर है। आंकड़े हमें वही बताते हैं, जो हम जमीन स्तर पर देख रहे हैं। कर्ज का बोझ  और फिर आत्महत्या के साथ किसानों की स्थिति गंभीर है।

 

हमारी पहली और सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता इस प्रवृत्ति की जांच करना है, जो कि शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) -बीजेपी शासन के दौरान शुरू हुई थी। कुछ हद तक, हम अभी भी इस मुद्दे से जूझ रहे हैं। वित्तीय बाधाओं के बावजूद, मेरी सरकार ने जून, 2017 में 5 एकड़ तक की जमीन वाले किसानों के लिए 200,000 रुपये तक की ऋण छूट और अन्य छोटे और सीमांत किसानों के लिए 200,000 रुपये की सहायता की घोषणा की है। इस कदम से बुरी तरह टूट चुके1.1 मिलियन किसानों को लाभ हुआ है। जैसा कि मैंने तब से कई अवसरों पर उल्लेख किया है, इसका मतलब यह है कि इन किसानों को बैंकों या किसी अन्य संस्था को अपने ऋण के किसी भी हिस्से का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

 

फिर, प्रगति के रास्ते पर कृषि समुदाय को वापस लाने का बड़ा मुद्दा है। हम किसानों की आय को बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण का जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं, जो अब किसानों के लिए फायदेमंद नहीं साबित हो रहा है। बागवानी मेरी सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, और हमने पहले ही एक बागवानी विश्वविद्यालय की स्थापना सहित कई पहल की घोषणा की है।

 

विदेशी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों के समर्थन से फसल विविधीकरण के अन्य क्षेत्रों का भी पता लगाया जा रहा है। कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए हम जल प्रबंधन और अभिनव सिंचाई पद्धतियों पर भी काम कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इन उपायों से अगले साल या दो वर्षों में जमीनी स्तर पर परिणाम दिखने शुरू हो जाएंगे।

 

इकोनोमिक एंड पॉलिटिकल वीकली’ में वर्ष 2014 के एक पत्र के अनुसार, “कृषि के मशीनीकरण में वृद्धि और सूचना प्रौद्योगिकी फर्मों में काम करने के लिए आवश्यक कौशल की कमी ने पंजाब के ग्रामीण शिक्षित युवाओं को एक अनिश्चत स्थिति में छोड़ दिया है।” पंजाब के युवाओं में तब बेरोजगारी दर 16.6 फीसदी थी, जबकि 2015-16 में भारतीय औसत 10.2 फीसदी थी। आपके राज्य के ग्रामीण युवा बेरोजगारी दर उस साल 16.5 फीसदी थी जो कि ग्रामीण भारत के 9.2 फीसदी से सात प्रतिशत अंक ज्यादा है। आपने अपने घोषणापत्र में ‘घर-घर रोजगार’ का वादा किया था। इस संबंध में आपकी क्या योजनाएं हैं, विशेष रुप से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए?

 

यह मेरे लिए गंभीर चिंता का विषय है। बेरोजगार युवक ड्रग्स और अपराध की चंगुल में फंसते जा रहे हैं, जो हमने पिछले 10 सालों में राज्य में बड़े पैमाने पर देखा है। ‘घर-घर रोजगार’ का हमारा वादा कुछ ऐसा है, जिसे हम लागू करने में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, और यह प्रक्रिया शुरु हो चुकी है। रोजगार मेला और युवाओं के लिए रोजगार की सुविधा के लिए सभी जिलों में रोजगार ब्यूरो की स्थापना के अलावा, हम एक बड़े पैमाने पर उद्यमिता को भी बढ़ावा दे रहे हैं।

 

युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए हमने उबर के साथ बाइक-टैक्सियों के लॉन्च के लिए करार किया है। हम कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, और युवाओं को स्वयं के रोजगार के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के साथ काम कर रहे हैं। हमारे आगे एक लंबा रास्ता है, लेकिन एक सकारात्मक शुरूआत की गई है, और हमने जो घोषणा की थी, उस वादे को हकीकत में बदलने के लिए मेरी सरकार प्रतिबद्ध है।

 

पंजाब का ड्रग संकट बहुत बड़ा है। पूरा देश इससे चिंचित है। 2015 पंजाब ओपियोड निर्भरता सर्वेक्षण के मुताबिक पंजाब में करीब 230,000 ऑपियॉइड आश्रित और 860,000 ऑपियोड उपयोगकर्ता हैं। क्या आप समस्या को समाजिक  मुद्दे के रूप में देखते हैं? सरकार नशीली दवाओं के उपयोगकर्ताओं के पुनर्वास के लिए क्या करती है और किस प्रकार ड्रग्स के लत को कम करने की उम्मीद करती है?

 

मुझे खुशी है कि आप गिरफ्तारी और दौरे को तरजीह न देकर पुनर्वास और ड्रग्स के लत को कम करने के मुदों पर चिंतित हैं। मेरी सरकार ने ड्रग्स तस्करों और इससे जुड़े व्यापारों की नकेल कसने के लिए विशेष कार्यबल स्थापित किया है । इस समस्या का सामाजिक पहलू यह है कि अब हमें वास्तव में कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है। पुनर्वास केन्द्रों के निरीक्षण के अलावा, हम भी मनोवैज्ञानिक परामर्शदाताओं का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि गुमराह होने वाले युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाया जा सके और उन्हें ड्रग्स में वापस जाने से रोका जा सके।

 

समस्या का मुकाबला करने के लिए जागरूकता हमारी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है।  ड्रग्स के खतरों से युवाओं और उनके परिवार को परिचित कराने के लिए ग्राम स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं। इस उद्देश्य के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और वे लोगों को समस्या के बारे में जागरूक कर रहे हैं। वे इसके रोकथाम और पुनर्वास के तरीकों पर भी काम कर रहे हैं ।

 

गांव के बड़े-बुजुर्गों को शामिल किया जा रहा है, और समस्या से निपटने के लिए सरकार और स्थानीय नेताओं द्वारा सामूहिक प्रयास किया गया है। और मैं आपको बता दूं, लोग खुद बड़ी संख्या में बाहर आ रहे हैं ताकि हमारे 24X7 हेल्पलाइन नंबरों को जानकारी देने और सहायता के इस प्रयास में मदद मिल सके।

 

पंजाब का उद्योग, सेवा और समग्र अर्थव्यवस्था 2015-16 में 5.9 फीसदी बढ़ी है, लेकिन यह 7.6 फीसदी के राष्ट्रीय औसत की तुलना में पीछे है। मई 2017 में आपने कहा, “उद्योग का पुनरुद्धार राज्य के विकास और निवेश को आकर्षित करने के लिए महत्वपूर्ण है।” आपने यह भी कहा था कि नई औद्योगिक नीति 2017 में बदलाव आएगा। ये नई नीतियां औद्योगिक विकास की दिशा में कैसे लागू होंगी?

 

हमारा मुख्य उद्देश्य निवेशक का विश्वास बहाल करना है, जिस पर पिछली सरकार की गलत नीतियों के जरिए कुप्रभाव पड़ा था और जिस कारण उद्योग या जो राज्य से चले गए या व्यवसाय बंद कर दिया गया था।

 

हमारी नई औद्योगिक नीति इस दिशा में हमारे प्रयासों को एक बड़ी दिशा देगी। हमारी रणनीति व्यापार को आसान बनाने, सिस्टम में पारदर्शिता लाने,  प्रक्रियाओं को सरल बनाने, मध्यस्थों की संस्कृति को समाप्त करने और माफियां को नष्ट करने पर केंद्रित है।

 

इस दिशा में ‘नई परिवहन नीति’ एक बड़ी उपलब्धि रही। परिवहन माफिया नियम समाप्त करके  हमने उद्योगों के लिए रसद सेवाओं को आसान बना दिया है।

 

हम सभी उद्योगों के लिए एक स्तर का क्षेत्र प्रदान करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं, जिसका अर्थ है कि एक ही प्रणाली और नियम नए और मौजूदा उद्योगों के लिए लागू होंगे।उद्योगों के लिए 5 रुपए प्रति यूनिट पर फ्रीजिंग पावर, और बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष रूप से राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की कुंजी है।  इन सभी कदमों ने उद्योग में विश्वास बहाल किया है जैसा कि पिछले पांच महीनों में भारत के और विदेशों में बड़े औद्योगिक घरानों और निवेशकों के प्रवाह से स्पष्ट है।

 

मैंने व्यक्तिगत रूप से मुंबई और चंडीगढ़ में भारतीय उद्योग के कुछ प्रमुखों से मुलाकात की है, और वे सभी विभिन्न निवेश और औद्योगिक विकास प्रस्तावों के साथ आ गए। उनके प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। इनमें गोदरेज, रिलायंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप, ब्रिटानिया, नेरोलैक, सैनोफी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई शामिल हैं।

 

कुछ लोग पंजाब में नई परियोजनाएं स्थापित करना चाहते हैं, जबकि कई ने मार्च 2017 में राज्य का अधिग्रहण करने के बाद से राज्य में प्रचलित अधिक अनुकूल औद्योगिक पर्यावरण को देखते हुए अपने प्रस्तावित निवेश में वृद्धि की है। उदाहरण के लिए पेप्सी ने हाल ही में अपनी चल रही परियोजनाओं के लिए मोहाली के आईटी शहर में 600 करोड़ का महत्वपूर्ण निवेश किया है। गोइंदवाल में नेरोलैक एक पेंट फैक्ट्री स्थापित कर रहा है, और हाल ही में 200 करोड़ अतिरिक्त निवेश करके अपनी मजबूत इच्छा शक्ति को दर्शाया है।

 

अमेरिका स्थित टायसन के सहयोग से गोदरेज ‘लुधियाना फूड पार्क’ में एक संयंत्र लगा रहा है। ब्रिटानिया भी पंजाब में एक नई इकाई शुरू करने के लिए उत्सुक है और एक उपयुक्त साइट की तलाश में है।

 

सार्वजनिक अस्पतालों में रिक्तियों और अनुपस्थिति के कारण पंजाब के ज्यादतर लोग निजी स्वास्थ्य सुविधाओं पर आश्रित हैं । निजी स्वास्थ्य सुविधाओं पर 83 फीसदी आउट पेशेंट और 66 फीसदी इन-पेशेंट आश्रित हैं।भारत भर में, पंजाब में अब अस्पताल में प्रवेश और चिकित्सा व्यय का उच्च औसत है। आपके राज्य के कैंसर रोगियों का सब्सिडी वाले सरकारी उपचार के लिए राजस्थान तक कई सौ किलोमीटर की यात्रा करने का एक महत्वपूर्ण कारण भी यही है। आप मंहगे निजी स्वास्थ्य और खराब गुणवत्ता वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या से निपटने के लिए क्या योजना बना रहे हैं?

 

स्वास्थ्य क्षेत्र मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है। हमने पंजाब के लोगों को सस्ती और गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था। हम सरकारी अस्पतालों और दवाखाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे और डॉक्टरों की कमी के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमारियों की समस्याओं के बारे में जानते हैं, और दवाओं की अनुपलब्धता से दुखी भी हैं। इसने निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बढ़ावा दिया है, जो राज्य के अधिकांश लोगों की पहुंच से परे है।
 

हमारी सरकार ने लोगों की स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकारी अस्पतालों और दवाखाने में महत्वपूर्ण कर्मचारियों की सेवाओं के बुनियादी ढांचे के विकास और नियुक्ति / विस्तार की प्रक्रिया शुरू की है। लोगों की पहुंच के भीतर गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य सेवा लाने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रेफरल मोहल्ला और वार्ड स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किए जा रहे हैं। हम मौजूदा संस्थानों में बुनियादी ढांचा, सुविधाओं और मानवशक्ति में सुधार के अतिरिक्त राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेज भी शुरू करेंगे।

 

जहां तक ​​कैंसर का संबंध है, हम विभिन्न कार्यक्रमों और परियोजनाओं पर अन्वेषण और काम कर रहे हैं। कई विदेशी संस्थानों ने न केवल किफायती कैंसर उपचार प्रदान करने के लिए, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में साफ पानी मुहैया कराकर समस्या की जड़ को खत्म करने की दिशा में अपना समर्थन जताया है। क्योंकि कैंसर फैलाने का सबसे बड़ा कारण अशुद्ध पानी है।

 

2016 के बजट के अनुसार पंजाब का कुल कर्ज 1.25 लाख करोड़ (19 बिलियन डॉलर) है। राज्य सरकार के कुल राजस्व का लगभग पांचवां हिस्सा अब कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल होता है। आपने 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के लिए 200,000 रुपए तक के ऋण माफी की घोषणा भी की है। क्या आपको लगता है कि सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं के कारण राज्य पर कर्ज बढ़ता है? आप वित्तीय स्थिरता किस प्रकार लाना चाहते हैं?

 

सबसे पहले, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि, जून, 2017 में जारी किए गए श्वेत पत्र के अनुसार, कुल बकाया ऋण 1.25 लाख करोड़ रुपए नहीं, बल्कि 2.08 लाख करोड़ रुपए ( 32 बिलियन डॉलर) है।  जैसा कि आप भी महसूस करेंगे, सरकार के रोज़गार के मामलों को प्रबंधित करने में हमारे लिए यह बड़ी रकम एक बड़ी बाधा है।

 

एक समाजवादी सरकार के रूप में, इस विशाल ऋण के बावजूद, यह हमारा कर्तव्य है कि मैं लोगों के कल्याण को सुनिश्चित करूं, विशेषकर उन लोगों के लिए मुझे काम करना होगा, जो पिछली सरकार के खराब प्रबंधन, भ्रष्टाचार और दुर्भावनापूर्ण नीतियों के शिकार बने और अब बदहाल जिंदगी जी रहे हैं।

 

पंजाब के किसान समाज के एक ऐसे ही वर्ग हैं। यह मेरी पार्टी का वादा है, और किसानों के लिए मेरी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है कि हम उन्हें पिछले 10 वर्षों में तबाही और दुःख की खाई से बाहर निकालेंगे, जिसमें वे फंसे हुए हैं। अब तक की ऋण छूट की घोषणा इस प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

 

आपके प्रश्न के दूसरे हिस्से का जवाब के लिए आप इसे इस तरह से देखें। वंचितों के उत्थान के लिए सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाएं आवश्यक हैं, लेकिन जब इसका दुरुपयोग किया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से वित्तीय संकट बढ़ जाता है। यही कारण है कि हम कुछ प्रमुख सामाजिक कल्याण योजनाओं को फिर से देख रहे हैं, इनमें  आटा-दाल योजना ( सब्सिडीयुक्त भोजन कार्यक्रम ) भी शामिल है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कार्यक्रम का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।

 

जहां तक ​​वित्तीय स्थिरता का सवाल है, हमने पहले ही राज्य की आर्थिक स्थिति को पुनर्जीवित करने के लिए कई पहल की हैं। हाल के हफ्तों में हमने जो निवेश देखा है, और जिस तरह से उद्योग पंजाब लौट रहे हैं, वह अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का एक प्रमुख स्रोत होगा। हमने निवेशकों और उद्योगों का विश्वास बहाल करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जो आने वाले महीनों में और बढ़ेगा।

 

माफिया (परिवहन, रेत आदि) और वीआईपी संस्कृति के उन्मूलन से राज्य के खजाने को बढ़ावा मिला है। जहां तक ​​सामान और सेवा कर का संबंध है, मैंने हमेशा यह सुनिश्चित रखा है कि सरकार के लिए बहुत आवश्यक धन पैदा करके राज्य के लिए यह एक बड़ी मदद होगी। मैं देखता हूं कि राज्य इस साल से लगभग 5,500 करोड़ रुपये कमा रहा है। हमने राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध से होटल और पर्यटन उद्योग को राहत देने के लिए पंजाब उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन किया है। मेरी सरकार ने वर्ष 2017-18 के लिए एक्साइज नीलामियों का सफलतापूर्वक आयोजन किया है और इससे1,016 करोड़ रुपए आए हैं यानी 2016-17 से 23 फीसदी ज्यादा।

 

वर्ष 2017 में 117 सीटों के लिए हुए चुनाव में 81 उम्मीदवारों में से सिर्फ छह महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। 2012 में 93 उम्मीदवारों में से केवल 12 ने जीत हासिल की थी। राज्य में महिलाओं का प्रतिनिधित्व इतना कमजोर क्यों है?

 

दुर्भाग्यवश, लिंग पूर्वाग्रह  राजनीति समेत अधिकांश व्यवसायों में जारी है। महिलाओं के सशक्तिकरण की कमी से यह राज्य पीछे जा रहा है।

 

महिला / लड़की सशक्तीकरण भी मेरी सरकार की प्राथमिकता में है। हमने पहले ही कई प्रमुख पहलों की शुरुआत की है। मेरी सरकार ने पंचायती राज (स्थानीय सरकार) संस्थानों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित किया है,जिससे सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण उपलब्ध कराया जा सके। हमने महिला एसिड हमले वाले पीडिताओं को 8,000 रुपए प्रति माह का भत्ता देने का भी फैसला किया है। हमने सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में नर्सरी से पीएचडी तक लड़कियों के छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा का निर्णय लिया है।

 

(अंसारी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं और दिल्ली में रहते हैं।)

 

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