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भारतीयों की आय माता-पिता की आय और शिक्षा पर निर्भर

श्रेया खेतान,
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जयपुर: मई 2018 में जारी विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया कि पांच अन्य बड़े विकासशील देशों के नागरिकों की तुलना में भारतीयों के लिए आगे बढ़ने की परिस्थितियों में अधिक बाधाएं हैं। ये पांच देश ब्राजील, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया और नाइजीरिया हैं। भारतीयों की आय उनके माता-पिता की आय और शैक्षणिक स्तर पर अधिक निर्भर है। इससे उनके जन्म के समय जो हालात थे,  उस सामाजिक-आर्थिक स्तर से ऊपर उठने की संभावना सीमित हो जाती है।

 

‘फेयर प्रोग्रेस: इकोनोमिक मोबिलिटी जेनरेशनस एराउंड का वर्ल्ड’, नाम की इस रिपोर्ट में उनके माता-पिता के साथ एक पीढ़ी की आय और शिक्षा स्तर की तुलना करने के बाद और आय और शैक्षिक स्तरों में पीढ़ियों के बीच अंतर की तुलना करके सापेक्ष गतिशीलता को मापा गया है।

 

विश्व बैंक में गरीबी और इक्विटी का अध्ययन करने वाले प्रमुख अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के सह-लेखक, अंबर नारायण ने रिपोर्ट के मूल प्रश्नों को समझाते हुए कहा कि ” यह निष्पक्षता समाज के बारे में है। क्या आपके पास समाज में आगे बढ़ने का मौका है, चाहे आप कहीं से भी हैं?  देश के दीर्घकालिक विकास के लिए गतिशीलता महत्वपूर्ण है। यदि आप अपनी क्षमता के लिए पुरस्कृत नहीं हैं, तो यह एक कुशल समाज नहीं है।”

 

अंतर-पीढ़ी गतिशीलता पर डेटा देश में अवसर की समानता पर प्रकाश डालने में मदद कर सकता है – गरीब और समृद्ध परिवारों में पैदा हुए लोगों के लिए एक स्तर का खेल मैदान मौजूद है। विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत पर डेटा 2011-12 के भारत मानव विकास सर्वेक्षण पर आधारित है, जो ‘मैरीलैंड विश्वविद्यालय’ के शोधकर्ताओं और नई दिल्ली में ‘नैशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ द्वारा आयोजित किया गया है। सबसे हालिया डेटा उस पीढ़ी के लिए है, जो 1980 में पैदा हुआ था और जो 2011-12 के सर्वेक्षण के लिए खुद अपने बारे में और अपने माता-पिता पर जानकारी देने में सक्षम थे।

 

नारायण कहते हैं, “माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चों की तुलना में बेहतर जीवन हो, जबकि बच्चे अपने माता-पिता की आय और शिक्षा स्तर से अलग अपनी आकांक्षाओं को पूरा करना चाहते हैं।”

 

माता-पिता की शिक्षा और आय का प्रभाव

 

रिपोर्ट ने बताया गया है कि 1940 के दशक में पैदा हुए लोगों की तुलना में 1980 के दशक में पैदा हुए लोगों ने शैक्षणिक स्तर पर प्रगति की है।

 

भारत में शिक्षा में इंटरजेनरेशनल गतिशीलता

लेकिन इस तरह के सुधार के बावजूद, भारत अपने विकासशील देश के साथियों के बीच कम शैक्षिक गतिशीलता प्रदान करता है।

 

चयनित विकासशील देशों में शिक्षा में इंटरजेनरेशनल गतिशीलता

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राजील, भारत, नाइजीरिया, पेरू और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में, यदि कोई व्यक्ति दूसरे द्वारा अर्जित राशि से दोगुना कमाता है तो औसतन, उसके बच्चे कम आय वाले व्यक्ति के बच्चे की तुलना में कहीं 60-70 फीसदी अधिक अर्जित करते हैं।

 

मिस्र, मोरक्को और पनामा जैसे देशों में अंतर और अधिक है, जहां ये आंकड़े 90 फीसदी तक हैं और कोलंबिया, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला और युगांडा जैसे देशों में यह 100 फीसदी तक हो सकता है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि तुलना में, बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड और नॉर्वे जैसे देशों में अंतर 20 फीसदी से कम है और संयुक्त राज्य अमेरिका और वियतनाम में 50 फीसदी से भी कम अंतर है।

 

रिपोर्ट में उन लोगों की गतिशीलता को भी मापा गया, जिनके माता-पिता शैक्षिणिक योग्यता में नीचे थे और पाया गया कि पीढ़ियों से शैक्षणिक स्तर माता-पिता के शैक्षणिक स्तर पर निर्भर थे

 

मिसाल के तौर पर, 71 फीसदी संभावना थी कि शैक्षिक प्राप्ति के मामले में निचले स्तर पर रहे माता-पिता से 1980 में जन्म लिए बच्चे निचले आधे में रहेंगे और केवल 9 फीसदी संभावना है कि वह ऊपरी स्तर तक जा पाए।

 

भारत में सबसे कम शिक्षा स्तर वाले माता-पिता के बच्चों में बढ़ने की संभावना

Probability That Child Born To Parents With Lowest Education Levels In India Will Move Up
Individual Born In *Probability Of Moving From Bottom Half To Lowest Quarter *Probability Of Moving From Bottom Half To Second Quarter **Probability Of Moving From Bottom Half To Third Quarter **Probability Of Moving From Bottom Half To Highest Quarter
1940 0.357194 0.323469 0.198599 0.120738
1950 0.371941 0.319064 0.198775 0.110219
1960 0.358653 0.323518 0.206648 0.111181
1970 0.390075 0.309021 0.196659 0.104245
1980 0.408908 0.297528 0.204539 0.089025

Source: Global Database on Intergenerational Mobility.
Note: This chart measures the effect of parents’ education on children’s education levels.
* Higher the number, lower the upward mobility.
** Higher the number, higher the upward mobility

 

भारत में, 1980 में पैदा हुई पीढ़ी में 17.8 फीसदी व्यक्तियों की आय पर उनके माता-पिता की शिक्षा का प्रभाव देखा जा सकता है। आय को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों को अलावा 7.2 फीसदी आय माता-पिता की शिक्षा प्रभावित करते हैं। अन्य कारकों में बच्चं का सर्वांगीण विकास और उनमें तकनीकि दक्षता का विकास शामिल है। 75 फीसदी आय के मामले में और शिक्षा के अलावा आय से संबंधित अन्य विशेषताओं जैसे अभिभावकीय रिश्ते और परिवेश महत्वपूर्ण हैं।

 

हालांकि अंतःविषय गतिशीलता पर डेटा गरीबी और असमानता के आंकड़ों की तरह ही जरूरी हैं।  वर्तमान में पर्याप्त डेटा उपलब्ध नहीं है। नारायण कहते हैं, “इस तरह के अधिक डेटा एकत्र किए जाने चाहिए। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में अभिभावकीय शिक्षा और व्यवसाय पर एक प्रश्न शामिल करके ऐसा करने का एक सरल, कम लागत वाला तरीका है। “

 

अनुसूचित जातियों और जनजातियों की इंटरजेनरेशनल गतिशीलता

 

अंतःविषय गतिशीलता में लिंग अंतर लड़कों से ज्यादा लड़कियों को बाधित करता है। ब्राजील, चीन, मिस्र और इंडोनेशिया में वर्तमान पीढ़ी में लगभग शून्य है। इसके विपरीत, यह 1940 के दशक, 1950 और 1980 के दशक में पैदा हुए लोगों के लिए भारत में अपरिवर्तित बनी हुई है।

 

अन्य आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि लड़कों की तुलना में लड़कियां भारत में अधिक नुकसान की स्थिति में हैं – 2015-16 में 68.4 फीसदी भारतीय महिलाएं साक्षर थीं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़े  85.7 फीसदी थे। और जन्म के समय लिंग अनुपात प्रति 1,000 लड़कों पर 919 महिलाओं का था। संतान के रूप में लड़के की चाह से यह अंतर बना हुआ है।

 

2012 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि सकारात्मक पक्ष पर, अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में, अनुसूचित जाति और जनजातियों के बीच अंतःविषय गतिशीलता में अंतर, 1983 और 2004-05 के बीच घट गया है। ‘अमेरिकन इकोनॉमिक जर्नल’ में प्रकाशित अध्ययन: ‘एप्लाइड इकोनॉमिक्स’ कहता है कि यह आर्थिक उदारीकरण और शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण नीतियों के कारण बाजार प्रतिस्पर्धा में वृद्धि करते हुए अनुसूचित जातियों और जनजातियों के भीतर, यह सामुदायिक नेटवर्क को सुदृढ़ करने का असर हो सकता है।

 

हमें क्या करना चाहिए?

 

रिपोर्ट में कहा गया है, “जीवन में शुरुआती हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जीवन में शुरुआती अंतराल के माध्यम से बाद में ऑफसेट करना मुश्किल होता है।” रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रम, जो बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, और प्रारंभिक बाल पोषण और संज्ञानात्मक विकास कार्यक्रम गरीब और अमीर बच्चों के बीच अवसरों में अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।

 

भारत जैसे कम और निम्न मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में, माता-पिता की बढ़ती आय और शिक्षा के साथ स्कूल नामांकन बढ़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन घरेलू आय पर बहुत ज्यादा निर्भर है।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि शिक्षा की गुणवत्ता पर विचार किया जाता है तो अवसर की असमानता बहुत अधिक होने की संभावना है। ‘एनुअल सर्वे ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में, 14-18 साल की आयु के 10 ग्रामीण निवासियों में से एक 5-7 साल की उम्र के बच्चों के लिए बनाई गई अपनी भाषा में पाठ पढ़ने में असमर्थ हैं, जैसा कि इंडियास्पेंड ने जनवरी 2018 की रिपोर्ट में बताया है। शिक्षा की गुणवत्ता में इस अंतर को कम करने से ऊपर की गतिशीलता में सुधार हो सकता है।

 

रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि शिक्षा में उच्च सार्वजनिक निवेश वाली अर्थव्यवस्थाएं शिक्षा में उच्च सापेक्ष गतिशीलता दिखाती हैं।

 

देश में सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात के रूप में भारत में शिक्षा पर सरकारी खर्च ऐतिहासिक रूप से कम रहा है। उदाहरण के लिए, ब्राजील ने 2014 में शिक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का 5.9 फीसदी खर्च किया, जबकि भारत ने 2.8 फीसदी खर्च किया। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में खर्च 2012-13 में सकल घरेलू उत्पाद का 3.1 फीसदी से घटकर 2017-18 में 2.7 फीसदी हो गया है।

 

भारत में शिक्षा खर्च

रिपोर्ट में कहा गया है, “पड़ोस जहां बेहतर परिवार रहते हैं उनकी तुलना में कम आय वाले परिवारों, या अल्पसंख्यक समूहों के पड़ोस में रहने वाले बच्चों के वंचित की संभावना अधिक है।”

 

“अनिवार्य समावेशी क्षेत्र और सामुदायिक भूमि ट्रस्ट जैसे कार्यक्रम, जो कम आय वाले परिवारों के लिए किफायती आवास प्रदान करते हैं, कार्यक्रमों का मार्गदर्शन करते हैं और सामाजिक नेटवर्क के माध्यम से हस्तक्षेप करते हैं, इससे लाभ हो सकता है । यही नहीं

 

स्थानीय कंपनियों में इंटर्नशिप दिला कर बच्चों को प्रेरित करने और उन्हें अवसर दिलाकर मदद करने के बाद असमानता कम हो सकती है।

 

रिपोर्ट कहती है कि, इसके अलावा, एक अच्छी तरह से काम करने वाले श्रम बाजार की भी जरूरत है। कम नौकरियां, सीमित श्रम गतिशीलता और मानव पूंजीगत निवेश की कीमत एक कर्मचारी की उत्पादकता से संबंधित विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग तय करना खतरनाक है।

 

(खेतान लेखक / संपादक हैं और इंडियास्पेंड के साथ जुड़ी हैं।)

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 4 जून, 2018 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

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