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आजादी के 70 साल बाद,दुनिया के 5 देशों की तुलना में अपना भारत बहुत पीछे नहीं!

इंडियास्पेंड टीम,
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स्वतंत्रता के बाद से 70 वर्षों में, भारत ने जीवन प्रत्याशा और साक्षरता में सबसे अधिक प्रगति की है, लेकिन पांच अन्य देशों से तुलना करने पर यह प्रगति आमदनी का स्तर बेहतर करने और शिशु मृत्यु दर घटाने में धीमी रही है।

 

इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, हमने आमदनी, स्वास्थ्य, शिक्षा में सुधार करने, और अपने वनों को संरक्षित करने में भारत की ओर से की गई प्रगति की तुलना, पांच देशों- चीन, पाकिस्तान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और ब्राजील से की है।

 

हमने इन पांच देशों को क्यों चुना?

 

हमने चीन को चुना, क्योंकि 1960 में इसकी प्रति व्यक्ति आमदनी भारत के लगभग समान थी। भले ही चीन और भारत की अब तक निरंतर तुलना की जाती है लेकिन हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि चीन ने संपत्ति और स्वास्थ्य के अधिकतर संकेतों में भारत को पीछे छोड़ा है।

 

हमने दक्षिण कोरिया को यह जानने के लिए देखा कि भारत ने एक ऐसे देश की तुलना में कैसा प्रदर्शन किया है जो 1947 के बाद एक विकासशील से विकसित देश बना है।

 

हमने पाकिस्तान को प्रगति की तुलना के लिए इसलिए चुना, क्योंकि पाकिस्तान समान इतिहास और संस्कृति को साझा करता है, और जिसका गठन भारत के साथ ही हुआ था।

 

ब्राजील ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों में से एक है, वह एक अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्था है और जिसके अगले 30 वर्षों में दुनिया में सबसे बड़े देशों में से एक बनने का अनुमान है।

 

हमने मलेशिया को चुना, क्योंकि इसकी भारत की तरह बहु-संस्कृति है। वैसे यह स्वतंत्रता के समय में भारत से अधिक समृद्ध था। इसने बड़े नस्लीय तनाव और टकराव का सामना किया है। यह भारत के निकट मौजूद एक ऐसा क्षेत्र है, जो दक्षिणपूर्व एशिया की अनूठी विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है।

 

56 वर्षों में भारतीय आमदनी 21 गुणा बढ़ी, लेकिन प्रगति चीन, मलेशिया से धीमी

 

वर्ल्ड बैंक के अनुमानों के अनुसार, भारत का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, जो प्रत्येक नागरिक की औसत आमदनी है और जनसंख्या के कल्याण को प्रदर्शित करता है, वर्ष 1960 में $81.3 ( लगभग1,705 रुपये) से 21 गुणा बढ़कर वर्ष 2016 में $1709.4 (लगभग 1,14,530 रुपये) पर पहुंच गया। लेकिन भारत ने चीन, मलेशिया, ब्राजील और दक्षिण कोरिया की तुलना में धीमी प्रगति की है।

 

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)

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Source: World Bank

 

प्रति व्यक्ति जीडीपी की गणना देश के जीडीपी को इसकी जनसंख्या से विभाजित कर प्राप्त की जाती है।

 

हमारी तुलना में, 56 वर्षों में, प्रति व्यक्ति जीडीपी में अंतर भारत और चीन के बीच सबसे अधिक बढ़ा है। 1960 में, भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी ($81.3) चीन के ($89.5) से 9फीसदी कम था। 2016 में, भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी ($1709.4) चीन के ($ 8123.2) से 79फीसदी कम था। ‘द हिंदू’ में जनवरी, 2015 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, बढ़ते अंतर का कारण चीन के श्रम बल की उत्पादकता में अधिक वृद्धि और प्रति कर्मी अधिक पूंजी हो सकता है।

 

इसी तरह भारत और दक्षिण कोरिया के बीच अंतर वर्ष 1960 की तुलना में लगभग दोगुना था। ‘क्वार्ट्ज’ के अप्रैल 2015 के एक लेख के अनुसार, दक्षिण कोरिया की वृद्धि का कारण तेजी से औद्योगीकरण और स्टील, शिपबिल्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर पर अधिक जोर देना हो सकता है।

 

वर्ष 1991 के बाद प्रत्येक वर्ष 7.5फीसदी के औसत की तुलना में, वर्ष 1991 तक, जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया था, प्रति व्यक्ति जीडीपी प्रति वर्ष 4.7फीसदी के औसत से बढ़ने का अनुमान है।

 

वर्ष 1960 में भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी ($81.3) मलेशिया ($234.9) 65फीसदी कम था, ब्राजील ($210) से 61फीसदी कम था और दक्षिण कोरिया ($158.2) से 49फीसदी कम था।

 

अभी भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी मलेशिया ($9502.6) से 82फीसदी कम है, ब्राजील ($8649.9) से 80 फीसदी कम है और दक्षिण कोरिया ($27538.8) से 94 फीसदी कम है।

 

वर्ष 1960 में भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी पाकिस्तान ($82.5) से 1.5 फीसदी कम था। अर्थशास्त्री अंकित मित्तल के ‘लाइवमिंट’ में सितंबर 2016 में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक रूप से प्रगति का कारण देश की अधिक क्षमता, आधारभूत ढांचे और भारी उद्योग में निवेश और कृषि क्रांति था जो पाकिस्तान में भारत से पहले शुरू हुई थी। लेकिन अब स्थिति पलट गई है और भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी इसके पश्चिमी पड़ोसी से 16.4फीसदी अधिक है।

 

जीवन प्रत्याशा में सुधार में ब्राजील, दक्षिण कोरिया से अधिक प्रगति

 

55 वर्षों में, जन्म पर भारत की जीवन प्रत्याशा, एक व्यक्ति के जीवन के वर्षों की औसत संख्या का अनुमान अगर मृत्यु दर के वर्तमान चलन उसके पूरे जीवन में समान रहते हैं, एक नागरिक के पूरे जीवनकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती का एक संकेत, 65.8 फीसदी या 27 वर्ष ज्यादा है।

 

जीवन प्रत्याशा

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Source: World Bank

 

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, वह नवीनतम वर्ष जिसके लिए डेटा उपलब्ध हैं, वर्ष 1960 में 41 वर्षों से, 2015 में जन्म पर औसत जीवन प्रत्याशा अब 68 वर्षों की है।

 

तुलना के लिए उपयोग किए गए पांच देशों में, जन्म पर औसत जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में भारत की प्रगति चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। वर्ष 1960 में, 43 वर्षों की एक औसत जीवन प्रत्याशा के साथ, चीन की स्थिति भारत के करीब थी। हालांकि, इसी अवधि में चीन में औसत जीवन प्रत्याशा 76.7फीसदी या 33 वर्ष बढ़कर 2015 में 76 वर्षों की औसत प्रत्याशा पर पहुंच गई।

 

पाकिस्तान की प्रगति भारत के समान रही है। वहां जीवन प्रत्याशा 65 फीसदी बढ़कर वर्ष 2015 में 66 वर्षों पर पहुंच गई है।

 

वर्ष 1960 से 2015 के बीच, भारत के लिए 65.8 फीसदी की वृद्धि के साथ 68 वर्षों की तुलना में ब्राजील की जीवन प्रत्याशा 38.8 फीसदी बढ़कर 75 वर्षों की हो गई है। दक्षिण कोरिया में जीवन प्रत्याशा 54.7 फीसदी की वृद्धि के साथ 82 वर्ष और मलेशिया में 27 फीसदी बढ़कर 75 वर्षों की हो गई है। इसके बावजूद, भारत को इन चार देशों में अधिक जीवन प्रत्याशा के साथ ही वैश्विक औसत तक भी पहुंचने की आवश्यकता है, जो 2015 में 71.4 वर्षों की बताई गई थी।

 

वर्ष 2015 के इस पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के अध्ययन के अनुसार,बाल मृत्यु दर कम करने की भारत की कोशिशों से वर्ष1990 से वर्ष 2013 के बीच मृत्यु दर में 3.7 फीसदी की बड़ी कमी हुई है और यह जन्म पर जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के प्रमुख कारणों में से एक है। शिशु मृत्यु दर 55 वर्षों में 76 फीसदी घटी है, लेकिन अन्य देशों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

 

55 वर्षों में, भारत की शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000 पर शिशुओं की संख्या जिनकी मृत्यु अपने पहले जन्मदिन से पूर्व हो गई) स्वास्थ्य व्यवस्था में मजबूती का एक संकेत है। वर्ल्ड बैंक की मानें तो नवीनतम वर्ष जिसके लिए डेटा उपलब्ध है, के अनुसार यह वर्ष 1960 में प्रति 1000 बच्चों पर 165 मृत्यु से 76 फीसदी घटकर वर्ष 2015 में 38 पर है।

 

शिशु मृत्यु दर

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Source: World Bank

Note: Figure for China is from 1969

 

लेकिन हमने तुलना के लिए जिन पांच देशों का उपयोग किया है उनमें से चार देशों का प्रदर्शन भारत से कहीं बेहतर रहा है। इससे पता चलता है कि भारत में भले ही शिशु मृत्यु दर घटा है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की प्रगति धीमी रही है।

 

वर्ष 1960 से 2015 के बीच भारत में 76 फीसदी कमी की तुलना में, ब्राजील में शिशु मृत्यु दर 92 फीसदी कम हुआ, दक्षिण कोरिया में शिशु मृत्यु दर में 96 फीसदी, और मलेशिया में 91फीसदी की कमी आई। चीन में शिशु मृत्यु दर 1969 और 2015 के बीच 92 फीसदी कम हुआ, इसी अवधि में भारत में 73फीसदी की कमी आई।

 

शिशु मृत्यु दर में पाकिस्तान अकेला ऐसा देश है, जिसने हमसे खराब प्रदर्शन किया है। वहां इस अवधि के दौरान शिशु मृत्यु दर सिर्फ 65 फीसदी कम हुआ है।

 

अमेरिका स्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कार्य करने वाले संगठन ‘एसोसिएशन ऑफ मैटरनल एंड चाइल्ड प्रोग्राम्स,’ के अनुसार, “शिशु मृत्यु दर बच्चों के स्वास्थ्य का एक अच्छा संकेत है, और सामुदायिक स्वास्थ्य, गरीबी और एक समुदाय की सामाजिक आर्थिक स्थिति और गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा तकनीक की उपलब्धता का एक आंशिक संकेत है। ”

 

साक्षरता पर भारत ने चीन और मलेशिया की तरह प्रगति की है !  

 

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार वर्ष 2015 में, 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के प्रत्येक 10 भारतीयों में से 7,  अपने प्रतिदिन के जीवन से संबंधित एक आसान, लघु बयान पढ़ और लिख सकते थे और समझ सकते थे । नवीनतम वर्ष जिसके लिए इस संकेत के संबंध में डेटा उपलब्ध हैं, जब प्रत्येक 10 भारतीयों में से 4 साक्षर थे, भारत की जनसंख्या में साक्षर व्यक्तियों की हिस्सेदारी 1980 से 30 फीसदी बढ़ी है।

 

साक्षरता

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Source:UNESCO, Foreign Policy Research Institute

Note: South Korea data for 2013

UNESCO Definition: A person who can read and write with understanding a simple short statement related to his/her everyday life

 

(स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना के अनुसार, जिसने साक्षरता की परिभाषा किसी ऐसे व्यक्ति के तौर पर दी थी जो “एक मित्र को एक पत्र लिख सकता है और… उत्तर पढ़ सकता है,” 1951 में, 05 वर्ष और अधिक उम्र के प्रत्येक 10 भारतीयों में केवल 02 साक्षर थे।)

 

‘यूनाइटेड नेशंस एजुकेशन, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन के डेटा पर आधारित भारत और पांच अन्य देशों पर हमारे विश्लेषण के अनुसार भारत ने 1980 से 2015 के बीच सभी अन्य देशों की तुलना में साक्षरता में सुधार करने में समान या अधिक प्रगति की है।

 

वर्ष 1980 में भारत के साक्षरता के एक निचले स्तर पर शुरुआत करने के कारण, इन देशों की तुलना में प्रगति की गुंजाइश बहुत अधिक थी। 1980 में दक्षिण कोरिया में 15 वर्ष और अधिक उम्र के लोगों में 94फीसदी साक्षरता थी और ब्राजील में 74.5 फीसदी जनसंख्या साक्षर थी।

 

भारत और ब्राजील, दक्षिण कोरिया और मलेशिया के बीच अंतर अब वर्ष 1980 की तुलना में कम है, इससे पता चलता है कि भारत साक्षरता दर के लिहाज से इन देशों के निकट पहुंच रहा है। वर्ष1980 में दक्षिण कोरिया के मुकाबले भारत में साक्षर व्यक्तियों की हिस्सेदारी 53 फीसदी कम थी, मलेशिया की तुलना में 29 फीसदी कम थी, ब्राजील से 34 फीसदी कम थी। वर्ष 2015 में, भारत की साक्षरता दर ब्राजील से 22 फीसदी, मलेशिया से 24 फीसदी, और दक्षिण कोरिया से 27 फीसदी कम थी।  भारत और चीन के बीच अंतर ( 25 फीसदी) लगभग समान रहा है और यही स्थिति भारत और पाकिस्तान के बीच अंतर (13 फीसदी) की भी है।

 

भारत में वन क्षेत्र में वृद्धि, लेकिन आंकड़ों में अधिक अनुमान की संभावना

 

वर्ल्ड बैंक के डेटा के अनुसार, 25 वर्षों में, भारत का वन क्षेत्र, कुल भूमि क्षेत्र की तुलना में (देश की अपनी हवा और पानी को साफ करने, जैव विविधता संरक्षित करने और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने की क्षमता का एक संकेत) वर्ष 1990 में 21.5 फीसदी था, जो बढ़कर वर्ष 2015 में 23.8 फीसदी हो गया।

 

वन क्षेत्र

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Source: World Bank

Note: Definition (FAO) – Land spanning more than 0.5 hectares with trees higher than five meters and a canopy cover of more than 10%, or trees able to reach these thresholds in situ. It does not include land that is predominantly under agricultural or urban land use.

 

हमने जिन पांच देशों के साथ तुलना की है उनमें से चार देशों से भारत ने वन क्षेत्र के संरक्षण के लिहाज से बेहतर प्रदर्शन किया है। जबकि चीन का प्रदर्शन भारत से बेहतर रहा है। इसका वन क्षेत्र 1990 में 16.7फीसदी से 5.5 फीसदी बढ़कर 2015 में  22.2 फीसदी हो गया। लेकिन चीन के वन क्षेत्र बढ़ाने के कार्यक्रम के प्रभाव पर संदेह है, क्योंकि लगाए गए पेड़ों में से बहुत से कम अवधि में मर गए।

 

‘फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन’ ने वन क्षेत्र की परिभाषा दी है-“ पांच मीटर से अधिक ऊंचे पेड़ों और 10फीसदी से अधिक के एक कैनोपी कवर, के साथ 0.5 हेक्टेयर से अधिक फैली भूमि।” इसमें वह जमीन शामिल नहीं है जो मुख्यतौर पर कृषि या शहरी भूमि के तहत उपयोग में है।

 

भारत सरकार के द्वारा वन क्षेत्र के अधिक अनुमान लगाने की संभावना है, क्योंकि यहां वन की परिभाषा में कृषि क्षेत्र भी शामिल है। वर्ष 1990 से 2015 के बीच, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और ब्राजील में वन क्षेत्र घटा है।

 

ब्राजील का वन क्षेत्र 1990 में कुल भूमि क्षेत्र के 65.4फीसदी से 6.5 फीसदी घटकर 2015 में 59 फीसदी रह गया। दक्षिण कोरिया का 1990 में 66फीसदी से 2.6 फीसदी कम होकर 2015 में 63.4फीसदी हो गया, जबकि मलेशिया में यह इसी समय अवधि में 0.5 फीसदी घटा है।

 

यह लेख मूलत: अंग्रेजी में 14 अगस्त 2017 को indiaspend.com पर प्रकाशित हुआ है।

 

शायद हिंदी में इस भूल सुधार की जरूरत न हो?
 
सुधारः इस लेख के पिछले संस्करण में बताया गया था कि चीन का वर्ष 1960 में प्रति व्यक्ति जीडीपी ($89.5) भारत से 9फीसदी अधिक था, और 2016 में भारत से 79फीसदी अधिक था। सही तथ्य यह है कि भारत का 1960 में प्रति व्यक्ति जीडीपी चीन ($89.5) से 9 फीसदी कम, और 2016 में चीन से 79 फीसदी कम था।
 

हमें गलती के लिए खेद है।

 

हम फीडबैक का स्वागत करते हैं। हमसे respond@indiaspend.org पर संपर्क किया जा सकता है। हम भाषा और व्याकरण के लिए प्रतिक्रियाओं को संपादित करने का अधिकार रखते हैं।

 
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